छप्पय

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. “छप्पय’ शीर्षक के रचयिता कौन है ?

[ A ] सूरदास
[ B ] कबीरदास
[ C ] नाभादास
[ D ] तुलसीदास

Answer ⇒ (C)

2. नाभादास की कौन-सी रचना है ?

[ A ] कड़बक
[ B ] कवित्त
[ C ] उषा
[ D ] छप्पय

Answer ⇒ (D)

3. नाभादास किस धारा के कवि थे ?

[ A ] निगुण धारा
[ B ] सदगणोपासक रामभक्त धारा
[ C ] सगुणधारा
[ D ] इनमें से कोई नहीं

Answer ⇒ (B)

4. नाभादास किसके समकालीन थे ?

[ A ] कबीरदास
[ B ] सूरदास
[ C ] तुलसीदास
[ D ] इनमें से कोई नहीं

Answer ⇒ (C)

5. नाभादास का जन्म कब हुआ था ?

[ A ] 1550 ई० में
[ B ] 1570 ई० में ( अनुमानित )
[ C ] 1560 ई० में
[ D ] 1565 ई० में

Answer ⇒ (B)

6. किसकी कविता को सुनकर कवि नाभादास सिर झुका लेते हैं ?

[ A ] सूरदास की
[ B ] कबीरदास की
[ C ] तुलसीदास की
[ D ] इनमें से कोई नहीं

Answer ⇒ (A)

7. कौन सी रचना नाभादास ] की है ?

[ A ] सूरसागर
[ B ] भक्तकाल
[ C ] बिहारी सतसई
[ D ] बीजक

Answer ⇒ (B)

8. नाभादास का स्थायी निवास कहाँ था ?

[ A ] वृंदावन
[ B ] हरिद्वार
[ C ] काशी
[ D ] इनमें से कोई नहीं

Answer ⇒ (A)

9. सम्पर्ण भक्तमाल में किस छंद की व्यंजना है ?

[ A ] चौपाई
[ B ] दोहा
[ C ] छप्पय
[ D ] कवित्त

Answer ⇒ (C)

10. छप्पय कितनी पंक्तियों का छंद होता है ?

[ A ] चार
[ B ] पाँच
[ C ] छह
[ D ] सात

Answer ⇒ (C)

11. सर के कवित्त को सुनकर सभी क्या करते है ?

[ A ] सिर हिलाते है
[ B ] भाव विभोर होते है
[ C ] दु:खी हो जाते है
[ D ] इनमें से कोई नहीं

Answer ⇒ (A)

12. “सर कवित्त सुनि कौन कवि’ में कौन-सा अलंकार है ?

[ A ] यमक
[ B ] रूपक
[ C ] उपमा
[ D ] अनुप्रास

Answer ⇒ (D)

13. कबीर किसमें भेद नहीं करते है ?

[ A ] अमीर-गरीब में
[ B ] अच्छे-बुरे में
[ C ] गोरे-काले में
[ D ] हिन्दू-मुसलमान में

Answer ⇒ (D)

14. नाभादास में जाति-पाँति एवं वर्णाश्रम का खण्डन किस कवि के छप्पय में किया है ?

[ A ] सूरदास
[ B ] कबीर
[ C ] बिहारी
[ D ] इनमें से कोई नहीं

Answer ⇒ (B)

15. नाभादास का उदय हिन्दी साहित्य के किस काल में हुआ ?

[ A ] आधुनिक काल
[ B ] आदिकाल
[ C ] भक्तिकाल
[ D ] रीतिकाल

Answer ⇒ (C)

16. सबके हित का वचन कौन कहता है ? ( पाठ के अनुसार )

[ A ] सूर
[ B ] कबीर
[ C ] जायसी
[ D ] विद्यापति

Answer ⇒ (B)

17. ‘कानि’ का अर्थ होता है –

[ A ] एक आँख का न होना
[ B ] एक कानवाला
[ C ] अविश्वास
[ D ] विश्वास, प्रतीति

Answer ⇒ (D)

18. नाभादास के दीक्षा गुरु हैं –

[ A ] स्वामी अग्रदास [ अग्रअली ]
[ B ] स्वामी शुद्धानंद
[ C ] स्वामी चतुर्भुजदास
[ D ] स्वामी नरहरिदास

Answer ⇒ (A)

19. ‘भक्तमाल’ के रचयिता कौन है ?

[ A ] कबीरदास
[ B ] गुरु नानक
[ C ] रैदास
[ D ] नाभादास

Answer ⇒ (D)

20. भक्त-चरित्रों की माला है –

[ A ] मुंडमाल
[ B ] पुष्पमाल
[ C ] भक्तमाल
[ D ] रत्नमाल

Answer ⇒ (C)

21. नाभादास किसके शिष्य थे ?

[ A ] तुलसीदास के
[ B ] रामानंद के
[ C ] स्वामी अग्रदास के
[ D ] महादास के

Answer ⇒ (C)

22. कबीरदास किस शाखा के कवि हैं ?

[ A ] सगुण शाखा के
[ B ] निर्गुण शाखा के
[ C ] सर्वगुण शाखा के
[ D ] इनमें से कोई नहीं

Answer ⇒ (B)

23. नाभादास किस काल के कवि थे ?

[ A ] भक्तिकाल के
[ B ] रीतिकाल के
[ C ] वीरगाथा काल के
[ D ] भारतेंदु काल के

Answer ⇒ (A)

24. नाभादास की कविता किन दो कवियों के बारे में है ?

[ A ] जायसो एव सूरदास
[ B ] कबीर एवं सूरदास
[ C ] सूरदास एवं तुलसीदास
[ D ] तुलसीदास एवं कबीरदास

Answer ⇒ (B)

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. नाभादास ने कबीर की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है ? उनकी क्रम से सूची बनाइए।

उत्तर ⇒ नाभादास ने कबीर की भक्ति के संदर्भ में कही बातों का उल्लेख करते हुए कहा है कि जो मनुष्य भक्ति से विमुख होता है वह अपना सर्व धर्म अधर्म कर लेता है। योग, व्रत, दान, भजन, हित की भाषा आदि को तुच्छ बना लेता है।

2. सूर के काव्य की किन विशेषताओं का उल्लेख कवि ने किया है ?

उत्तर ⇒ नाभादास ने सूर के काव्य के चमत्कार, अनुप्रास एवं उनकी भाषा की सुन्दरता की सराहना की है। सूर के कष्ठ में उपस्थित ‘प्रीति तत्व’ एवं इनकी भाषा में उपस्थित ‘तुक’ की प्रशंसा की है। नाभादास के अनुसार सूर के काव्य के श्रवण से बुद्धि विमल होती है। सूर ने अपने काव्य में कृष्ण के जन्म, कर्म, गुण रूप आदि को प्रतिबिम्बित कर दिया है।

3. ‘मुख देखी नाहिन भनी’ का क्या अर्थ है ? कबीर पर यह कैसे लागू होता है ?

उत्तर ⇒ प्रस्तुत पद्यांश में कबीर के अक्खड़ व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया है। कबीर ऐसे प्रखर चेतना संपन्न कवि हैं जिन्होंने कभी भी मुँह देखी बातें नहीं की। उन्हें सच को सच कहने में तनिक भी संकोच नहीं था। राज सत्ता हो या समाज की जनता, पंडित हों या मुल्ला-मौलवी सबकी बखिया उधेड़ने में उन्होंने तनिक भी कोताही नहीं की। उन्होंने इसलिए अपनी अक्खड़ता, स्पष्टवादिता, पक्षपातरहित कथन द्वारा लोकमंगल के लिए अथक संघर्ष किया।

4. ‘पक्षपात नहीं वचन सबहिके हित की भाखी।’ इस पंक्ति में कबीर के किस गुण का परिचय दिया गया है ?

उत्तर ⇒ प्रस्तुत पंक्तियाँ महाकवि नाभादासजी द्वारा विरचित ‘भक्तमाल’ काव्य कृति से ली गयी है। इन पंक्तियों में भक्त कवि ने महाकवि कबीर के व्यक्तित्व का स्पष्ट चित्रण किया है। कबीर के जीवन की विशेषताओं की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया है।

क्या हिन्दू और क्या तुरक, सभी के प्रति कबीर ने आदर भाव प्रदर्शित किया और मानवीय पक्षों के उद्घाटन में महारत हासिल की। कबीर के वचनों में पक्षपात नहीं है। वे सबके हित की बातें सोचते हैं और वैसा ही आचरण करने के लिए सबको कविता द्वारा जगाते हैं। सत्य को सत्य कहने में तनिक झिझक नहीं, भय नहीं, लोभ नहीं। इस प्रकार क्रांतिकारी कबीर का जीवन-दर्शन सबके लिए अनुकरणीय और वंदनीय है। लोकमंगल की भावना जगानेवाले इस तेजस्वी कवि की जितनी प्रशंसा की जाय, थोड़ी ही होगी। कबीर क्रांतिकारी कवि, प्रखर चिंतक तथा महान दार्शनिक थे।

5. कविता में तुक का क्या महत्व है ? इनका छप्पयों के संदर्भ में स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ कविता में ‘तुक’ का अर्थ अन्तिम वर्णों की आवृत्ति है। कविता के चरणों के अंत में वर्णों की आवृत्ति को ‘तुक’ कहते हैं। साधारणतः पाँच मात्राओं की ‘तुक’ उत्तम मानी गयी है।

संस्कृत छंदों में ‘तुक’ का महत्व नहीं था, किन्तु हिन्दी में तुक ही छन्द का प्राण है।
‘छप्पय’- यह मात्रिक विषम और संयुक्त छंद है। इस छंद के छः चरण होते हैं इसलिए इसे ‘छप्पय’ कहते हैं।

प्रथम चार चरण रोला के और शेष दो चरण उल्लाला के, प्रथम-द्वितीय और तृतीय चतुथ के योग होते हैं। छप्पय में उल्लाला के सम-विषम (प्रथम-द्वितीय और तृतीय-चतुर्थ) चरणों का यह योग 15 + 13 = 28 मात्राओं वाला ही अधिक प्रचलित है। जैसे भगति विमख जे धर्म स अब अधरम करि गाए। योग, यज्ञ, व्रत, दान, भजन बिनु, तुच्छ, दिखाओ।

6. ‘कबीर कानि राखी नहिं’ से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर ⇒ कबीरदास महान क्रांतिकारी कवि थे। उन्होंने सदैव पाखंड का विरोध किया। भारतीय षड्दर्शन और वर्णाश्रम की ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। वर्णाश्रम व्यवस्था का पोषक धर्म था-षडदर्शन। भारत के प्रसिद्ध छ: दर्शन हिन्दुओं के लिए अनिवार्य थे। इनकी ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कबीर ने षड्दर्शन की बुराइयों की तीखी आलोचना की और उनके विचारों की ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया यानी कानों से सुनकर ग्रहण नहीं किया बल्कि उसके पाखंड की धज्जी-धज्जी उड़ा दी। कबीर ने जनमानस को भी षडदर्शन द्वारा पोषित वर्णाश्रम की बुराइयों की ओर सबका ध्यान आकृष्ट किया और उसके विचारों को मानने का प्रबल विरोध किया।

7. कबीर ने भक्ति को कितना महत्त्व दिया ?

उत्तर ⇒ कबीर ने अपनी सबदी, साख और रमैनी द्वारा धर्म की सटीक व्याख्या प्रस्तुत की। लोक जगत में परिव्याप्त पाखंड, व्यभिचार, मूर्तिपूजा, जाति-पाँति और छुआछूत का प्रबल विरोध किया। उन्होंने योग, यज्ञ, व्रत, दान और भजन की सही व्याख्या कर उसके समक्ष उपस्थित किया।

कबीर ने भक्ति में पाखंडवादी विचारों की जमकर खिल्लियाँ उड़ायी और मानव-मानव के बीच समन्वयवादी संस्कृति की स्थापना की। लोगों के बीच भक्ति के सही स्वरूप की व्याख्या की। भक्ति की पवित्र धारा को बहाने, उसे अनवरत गतिमय रहने में कबीर ने अपने प्रखर विचारों से उसे बल दिया। उन्होंने विधर्मियों की आलोचना की। भक्ति विमुख लोगों द्वारा भक्ति की परिभाषा गढ़ने की तीव्र आलोचना की। भक्ति के सत्य स्वरूप का उन्होंने उद्घाटन किया और जन-जन के बीच एकता, भाईचारा प्रेम की अजस्र गंगा बहायी। वे निर्गुण विचारधारा के तेजस्वी कवि थे। उन्होंने ईश्वर के निर्गुण स्वरूप का चित्रण किया। उसकी सही व्याख्या की। सत्य स्वरूप का सबको दर्शन कराया।

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